Rig Veda - Book 07 - Hymn 46
Text: Rig Veda Book 7 Hymn 46 इमा रुद्राय सथिरधन्वने गिरः कषिप्रेषवे देवाय सवधाव्ने | अषाळ्हाय सहमानाय वेधसे तिग्मायुधाय भरता शर्णोतु नः || स हि कषयेण कषम्यस्य जन्मनः साम्राज्येन दिव्यस्य चेतति | अवन्नवन्तीरुप नो दुरश्चरानमीवो रुद्र जासु नो भव || या ते दिद्युदवस्र्ष्टा दिवस परि कष्मया चरति परि साव्र्णक्तु नः | सहस्रं ते सवपिवात भेषजा मा नस्तोकेषुतनयेषु रीरिषह || मा नो वधी रुद्र मा परा दा मा ते भूम परसितौ हीळितस्य | आ नो भज बर्हिषि जीवशंसे यूयं पात … ||...