Rig Veda - Book 05 - Hymn 76
Text: Rig Veda Book 5 Hymn 76 आ भात्य अग्निर उषसाम अनीकम उद विप्राणां देवया वाचो अस्थुः | अर्वाञ्चा नूनं रथ्येह यातम पीपिवांसम अश्विना घर्मम अछ || न संस्क्र्तम पर मिमीतो गमिष्ठान्ति नूनम अश्विनोपस्तुतेह | दिवाभिपित्वे ऽवसागमिष्ठा परत्य अवर्तिं दाशुषे शम्भविष्ठा || उता यातं संगवे परातर अह्नो मध्यंदिन उदिता सूर्यस्य | दिवा नक्तम अवसा शंतमेन नेदानीम पीतिर अश्विना ततान || इदं हि वाम परदिवि सथानम ओक इमे गर्हा अश्विनेदं दुरोणम | आ नो दिवो बर्हतः पर्वताद आद्भ्यो यातम इषम ऊर्जं वहन्ता || सम अश्विनोर अवसा नूतनेन मयोभुवा सुप्रणीती गमेम | आ नो रयिं वहतम ओत वीरान आ विश्वान्य अम्र्ता सौभगानि ||...